देवी पार्वती पर उनके ही पुत्र ने क्यों डाली बुरी नजर
देवी पार्वती पर उनके ही पुत्र ने क्यों डाली बुरी नजर
भगवान शिव की कृपा सभी भक्तों पर हर वक्त बनी रहती है।हमारे धर्मग्रंथों में कई ऐसी कथाएं मौजूद है जो ये दर्शाती है की भगवान शिव बड़े ही दयालु है और वो अपने भक्तो से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं । दोस्तों आज में भगवान शिव की ऐसी कथा बताने जा रहा हूँ जिसमे माता पार्वती के पुत्र ने ही उन पर बुरी नजर डाली थी।
कौन था शिव और पार्वती का तीसरा पुत्र
हम सभी जानते हैं की भगवान शिव और माता पार्वती के दो पुत्र कार्तिकेय और श्री गणेश हैं। पर ये कम ही लोग जानते हैं की भगवान शिव और माता पार्वती के इन दोनों के अलावे एक और पुत्र था,जिसका वध स्वंय शिवजी ने अपने हाथों से किया था।
कथा के मुताबिक एक बार शिवजी और माता पार्वती घूमते हुए काशी पहुंचे।काशी भगवान शिव को बहुत ही मनोरम लगा और वो वहीँ पूर्व की ओर अपना मुख करके ध्यान की मुद्रा में बैठ गए।इतने में देवी पार्वती को एक मजाक सुझा और उन्होंने पीछे से शिवजी की दोनों आँखे अपने हाथों से बंद कर दी।माता पार्वती के ऐसा करते ही तीनो लोको में अंधकार छा गया।तब भगवान शिव ने अपना तीसरा आँख खोल दिया।जिसके बाद तीनो लोको में फिर से उजाला हुआ।
पसीने से जन्म था यह पुत्र
शिव की आँख की तेज से माता पार्वती के पसीने छूटने लगे।उन्ही पसीनो की बून्द से एक बालक उत्पन्न हुआ।उस बालक को देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उसकी उत्पत्ति के बारे में पूछा।
भगवान शिव ने पसीने से उत्पन्न होने के कारण उसे अपना पुत्र बताया।अंधकार में उत्पन्न होने की वजह से उसका नाम अंधक रखा गया।अंधक देखने में असुरों की तरह बड़ा भयानक था।उसी समय असुरों का राजा हिरण्याक्ष भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगा। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उसे वर मांगने को कहा।तब उसने महादेव से एक बलशाली पुत्र की कामना की।शिवजी ने उसे अपना पुत्र अंधक ही सौंप दिया।
वरदान में अंधक को पाकर हिरण्याक्ष बहुत ही प्रसन्न हुआ।इस प्रकार अंधक का लालन पालन असुरों के बीच हुआ।और आगे चल कर शिव और पार्वती का ये पुत्र असुरों का राजा बन गया।अंधक शक्तिशाली बनना चाहता था।इसलिए उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करने लगा।अंधक की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और वर मांगने को कहा।तब अंधक ने उनसे वरदान मांगा कि कोई भी उसका वध नहीं कर पाए और उसकी मृत्यु तब हो जब वह अपनी ही माता पर बुरी नजर डाले।अंधक ने सोचा था की ऐसा कभी नहीं होगा क्योकि उसकी कोई माता नहीं है।
अंधक का वध
वर प्राप्त कर अंधक और भी शक्तिशाली बन गया और तीनो लोकों पर विजय प्राप्त कर लिया ।तीनो लोक जितने के बाद उसे लगा की अब उसके पास सब कुछ है इसलिए उसे शादी कर लेनी चाहिए। उसने तय किया की वो तीनो लोकों की सबसे सुन्दर स्त्री से शादी करेगा।जब उसने पता किया तो उसे पता चला की तीनो लोकों में पार्वती से सुन्दर कोई नहीं है।जिसने अपने पिता का वैभव त्याग कर शिव से शादी कर ली है।वो तुरंत पार्वती के पास गया और उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा।पार्वती के मना करने पर वो उनसे जबरदस्ती ले जाने लगा तो पार्वती ने शिव का आह्वान किया।पार्वती के आह्वान पर शिव वहां उपस्थित हुए और उसने अंधक को बताया की तुम पार्वती के ही पुत्र हो।और ऐसा कहकर उन्होंने अंधक का वध कर दिया।

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