रामायण में विश्वामित्र का वन में यज्ञ

विश्वामित्र एक बहुत ही महत्वपूर्ण पात्र हैं.

आपको बता दें. रामायण में विश्वामित्र जिस वन में यज्ञ कर रहे थे, उस वन का नाम सुंदर वन था. विश्वामित्र राजा दशरथ से अनुरोध किया कि वह राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन ले जाना चाहते हैं, क्योंकि सुंदर वन में ताड़का नाम की राक्षसी रहती थी. वह ऋषियों के यज्ञ को पूरा नहीं होने देती थी. यज्ञ कुंड में मास डाल देती थी. ताड़का सुकेतु यक्ष की पुत्री थी. जिसका विवाह सुड नामक राक्षस के साथ हुआ था.
रामायण में विश्वामित्र

ताड़का के 2 पुत्र भी थे. जिनके नाम सुबाहु और मारीच. ताड़का के शरीर में हजारों हाथियों का बल था. लेकिन उस समय राम और लक्ष्मण की उम्र बहुत छोटी थी. इसलिए राजा दशरथ ने मना कर दिया. लेकिन बार बार अनुरोध करने के बाद राजा दशरथ राम और लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ सुंदरवन में भेजने के लिए राजी हो गए.

ये राक्षस ऋषियों को परेशान करते रहते थे. जिस कारण विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन लेकर गए थे. इसके बाद राम  ने मिलकर ताड़का का वध किया तथा उसके साथ ही जितने भी राक्षस थे उन सबको मारकर ऋषियों का यज्ञ पूरा करवाया.


विश्वामित्र वैदिक काल के विख्यात ऋषि थे. ये राजा गाधि के पुत्र थे. ऐसा माना जाता है कि ऋषि बनने से पूर्व विश्वामित्र राजा होते थे. विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम.

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